नई दिल्ली, 16 फ़रवरी 2026 — अभिनेत्री और UNFPA इंडिया की यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकार (SRHR) एडवोकेट, सोहा अली खान ने आज नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में महिलाओं और लड़कियों के लिए डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाने हेतु नैतिक और लैंगिक दृष्टि से संवेदनशील कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
भारत मंडपम में आयोजित उच्चस्तरीय सत्र “प्रौद्योगिकी में जेंडर की पुनर्कल्पना: सुरक्षित डिजिटल भविष्य की रचना और समावेशी प्लेटफॉर्म के लिए नैतिक एआई को आगे बढ़ाना” में मुख्य वक्तव्य देते हुए, सुश्री खान ने एक सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने तकनीक की संभावनाओं के साथ-साथ ऑनलाइन दुनिया में महिलाओं के सामने बढ़ते जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा, “तकनीक ने लाखों भारतीय महिलाओं के लिए सीखने, काम करने और अपनी बात रखने के नए रास्ते खोले हैं। लेकिन इन अवसरों का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब महिलाएं ऑनलाइन सुरक्षित महसूस करें। हमारे पास यह मौका है कि हम एआई को इस तरह विकसित करें कि वह महिलाओं की सक्रिय रूप से रक्षा करे और डिजिटल स्पेस में अधिक से अधिक आवाज़ों को आत्मविश्वास के साथ आगे आने में मदद करे।”
यह सत्र संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा इकिगाई लॉ और मेलबर्न विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया और भारत में जेंडर-संवेदनशील एआई शासन और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को मज़बूत करने पर चर्चा की। भारत में 75 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और लाखों महिलाएं पहली बार ऑनलाइन दुनिया से जुड़ रही हैं। ऐसे में एआई शासन को लेकर भारत का रुख वैश्विक स्तर पर नैतिक, समावेशी और अधिकार-आधारित तकनीक के मानक तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
अपने उद्घाटन वक्तव्य में, UNFPA इंडिया की प्रतिनिधि और UNFPA भूटान की कंट्री डायरेक्टर, एंड्रिया एम. वोजनार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के डिजिटल भविष्य में महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “एआई के क्षेत्र में भारत का नेतृत्व हमें यह अवसर देता है कि हम शुरू से ही ऐसी प्रणालियां बनाएं जो सुरक्षित, समावेशी और मानवाधिकारों पर आधारित हों। अगर हम तकनीक को महिलाओं के अधिकारों को केंद्र में रखकर डिज़ाइन और संचालित करते हैं, तो हम सिर्फ नुकसान को कम नहीं करते, बल्कि भागीदारी, नवाचार और सभी के लिए साझा प्रगति के रास्ते खोलते हैं।”
मुख्य वक्तव्य के बाद एक पैनल चर्चा हुई, जिसका संचालन टेक विशेषज्ञ राजीव मखानी ने किया। पैनल में शामिल थे:
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महामहिम मे-एलिन स्टेनर, भारत में नॉर्वे की राजदूत
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कैरोलिन फ्लोरे, डिजिटल डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट, एशियाई विकास बैंक (ADB)
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उथारा गणेश, हेड ऑफ पब्लिक पॉलिसी, APAC, स्नैप इंक.
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अर्पिता कंजीलाल, प्रमुख, रिसर्च और कम्युनिकेशंस डिवीजन, डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन
चर्चा में सुरक्षित डिज़ाइन, भारतीय भाषाओं में काम करने वाली एआई प्रणालियां, और भारत में डिजिटल जेंडर गैप को कम करने के आर्थिक लाभ जैसे व्यावहारिक कदमों पर बात हुई। सत्र का समापन इस स्पष्ट समझ के साथ हुआ कि महिलाओं के लिए डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाना और एआई को उनकी ज़रूरतों के अनुसार ढालना अब एक तात्कालिक आवश्यकता है। वक्ताओं ने नीति-निर्माताओं, तकनीकी प्लेटफॉर्म, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के बीच करीबी सहयोग की अपील की, ताकि नैतिक एआई को ज़मीन पर लागू किया जा सके। इसके साथ ही एक “एथिकल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन शोकेस” में भारत और ग्लोबल साउथ से आए ऐसे नवाचारों को भी प्रदर्शित किया गया जो अधिक सुरक्षित और समावेशी डिजिटल स्पेस बनाने में मदद कर रहे हैं।
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पिंकी प्रधान, कम्युनिकेशंस और मीडिया स्पेशलिस्ट ईमेल: ppradhan@unfpa.org | फ़ोन: +91 9810788435
UNFPA के बारे में
UNFPA संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है। UNFPA का मिशन ऐसी दुनिया बनाना है जहाँ हर गर्भावस्था इच्छित हो, हर प्रसव सुरक्षित हो और हर युवा अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच सके। UNFPA सभी के लिए प्रजनन अधिकारों की वकालत करता है और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का समर्थन करता है, जिसमें स्वैच्छिक परिवार नियोजन, गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य देखभाल और व्यापक यौन शिक्षा शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए देखें: https://india.unfpa.org/en
